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सैनिकों की संगिनियाँ..._कविता

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     'शहिद' शब्द के आँखों से  गुज़रने की आहट से ही पलट देती हूँ अखबार के पन्ने स्क्रोल कर देती हूँ  फेसबुक की पोस्ट अपडेट बदल देती हूँ चैनल टीवी की क्लोज़ कर देती हूँ फ़ाइल  ट्विटर की लॉग ऑउट होना चाहती हूँ उन तमाम सुर्खियों-दलीलों-खबरों से जो भय दिखाती  आगाह करती हैं, अभी-अभी ब्याही है सीमा के पहरेदार से... सजदे में शीश नवा दुवाओं मन्नतों की ताबीज़ से विश्वास को और मजबूत करके भी खुद एक सवाल संग उलझी रहती हूँ.. सरज़मीं के लिए वो भी तो सर्वस्व न्योछावर करती हैं, ब्याह में सिंदूरदान की रस्म निभा युद्ध में सिंदूर दान कर देती हैं, रिश्तों की रिक्तता भरती रहती स्वयं शून्य होती जाती हैं, ये सैनिकों की संगिनियाँ  इतना धैर्य कहाँ से पाती हैं.... * सीमा सिंह*

एक फौजी के बॉर्डर पर चले जाने के बाद..._कविता

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https://photosplusbejodindia.blogspot.com/2019/09/blog-post_19.html?m=1 एक फौजी के बॉर्डर पर चले जाने के बाद, शक्तिविहीन मुस्कुराहट के साथ जीते हैं माता-पिता, भाई-भाभी, घर के बच्चे और इन सबके अलावा भी, कहीं बंद कमरे में सिसकती है, उनकी शरीक-ए-हयात। दोनों ने क्या खूब मोहब्बत की, है मीलों की दूरी और बिना नेटवर्क बातें अधूरी एक-दूजे को याद कर कर लेते हैं दोनों ही अपने दिल की बात । एक फौजी के बॉर्डर पर चले जाने के बाद, खुद से गिले-शिकवे करती हैं, पिछली बार का किस्सा अब भी मुझे याद है, सिक्कीम के पहाड़ों में मुझसे बात करने के लिए मिलों चलकर बर्फ़ीले तूफ़ान में आपका बर्फ़ होना कमाल है, आपकी आशिकी और मोहब्बत मुझसे बेशुमार है । इस बार वादा किए थे घर आ जाएँगे आज, सुबह से शब गुज़र गई, ना मैसेज कोई आया, ना आपके नाम की रिंग बजी, मैं इंतज़ार करती रह गई, और नहीं आए आप.... वाकिफ़ होंगे आप ही, कहीं बंद कमरे में सिसकती है आपकी शरीक-ए-हयात। बॉर्डर पर ड्यूटी में तैनात फौजी के दिल से भी आती है ये सदा, इक खुद से ग़िला बाक़ी रहा.. दुनिया को छोड़ सिर्फ़ तुमसे मैं वाकिफ़ रहा.. है त...