इश्क समाधि_उपन्यास_समीक्षा
http://hindikitab.com/HindiKitab/GetBookDetail?Bkmst_cd=000865 देखने में सुंदर देहयेष्टि की स्त्रियों को जब उनके मनचाहे देह से कामरूपी सुख की प्राप्ती नहीं होती तब वही तिरस्कार के तीर से घायल स्त्री प्रतिशोध की ज्वाला में जलती हुई अपने शीलगुण को ताक पर रख वह सारे कर्म करती है जिससे उसका तथाकथित (सो कॉल्ड) बड़प्पन बरकरार रहे और इस अग्नि कुंड में वह अपना तन, मन, धन सर्वस्व स्वाहा कर देती है । और कहा जाता है कि, अपना शरीर, चरित्र, मान-मर्यादा, बुद्धी, तर्क सब कुछ गवाँने के बाद ही जीवन का वास्तविक सत्य अक्ल के ठिकाने लगता है । ऐसी ही एक मार्मिक-यथार्थ कथावस्तु लिए #बिहार - #आरा जिला, #एकवना #गाँव के नए उभरते #लेखक #ऋत #विकास अपने #प्रथम #उपन्यास #इश्क़ #समाधि से आधुनिकता की चकाचौंध में आँखें गड़ाकर दौड़ रहे युवाओं को जीवन के वास्तविक प्रेम एवं सत्य का चश्मा देने का कार्य किया है । आधुनिक विचार, आत्मविश्वास, और विपरीत परिस्थितियों का सामना कर लक्ष्य को प्राप्त करने की योग्यता रखने वाली #योगिना तथा इंद्रिय-मन-बुद्धि-आत्मा, अलौकिक प्रेम की पराकाष्ठा लिए #फकीरा के द्वारा वर्तमान ...