लोकगीतों में ध्वनित जीवन के स्वर_भोजपुरी लोकगीत_किताब


https://youtu.be/Y5Lq2i6hh1s 

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वाचिक परंपरा की धरोहर, लोकगीतों की यह विशेषता रही है समकालीन  परिस्थितियों को मार्मिकता के साथ ही व्यंग्यात्मक रूप से लयबद्ध कर अभिव्यक्त करने की। पारंपरिक रूप से गाये जाने वाले लोकगीतों को वर्तमान समय में भी घर-घर में सुना जा सकता है।

हिंदी विभाग, मुंबई विश्वविद्यालय से प्रोफ़ेसर डॉक्टर दत्तात्रय मुरुमकर सर के मार्गदर्शन में एम. फिल. उपाधि हेतु चयनित विषय लोकगीतों पर  संपन्न शोध अब पुस्तक के रूप में भी प्रस्तुत है।

लोकगीत क्षेत्र विशेषानुरूप होते हैं और इस पुस्तक में अन्य आंचलिक क्षेत्रों के लोकगीतों के साथ आरा, बिहार क्षेत्र के भोजपुरी लोकगीतों का विशेष संदर्भ दिया गया है। अधिकतर लोकगीत मेरे द्वारा यहाँ के स्थानीय महिलाओं से मिलकर लिखवाए गए हैं। उन महिलाओं से प्राप्त सहयोग और जानकारी अत्यंत महत्वपूर्ण है।

 मुझे पूरा विश्वास है कि इस पुस्तक को पढ़ने के बाद पाठकों के मन में लोकगीतों के प्रति जिज्ञासा तो बढ़ेगी ही साथ ही भोजपुरी लोकगीतों में अभिव्यक्त जनजीवन के प्रति सकारात्मक नज़रिया भी प्रबल होगा। लुप्त होती जा रही परंपरा को सहेजने का मेरा एक प्रयास आप सभी के समक्ष सादर प्रस्तुत है।

आप भी दिए गए लिंक पर मेरी यह किताब ऑर्डर कर सकते हैं। पाठकीय प्रतिक्रिया के इंतज़ार में-


*सीमा सिंह*


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