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भोजपुरी भाषा के मिट्टी के सौंधी सी महक लेले #डॉ. #नीरज #सिंह जी द्वारा लिखल कहानी #थाती पढ़े के मौके मिलल । कहानी अपना शीर्षक के अनुरूप ही भोजपुरी कथा क्षेत्र में आपन महत्वपूर्ण स्थान चिन्हित करे में पूर्ण रूप से कामयाब साबित भईल बा।
कहानी के कथानक में बाबू वीरकुंवर सिंह जे बिहार आरा जिला के गौरव हवन उनकर पत्नी रानी और प्रेमिका मेहरुन्निसा तीनों के जीवन से जुड़ल मार्मिक अउर संवेदनशील मोड़ अउर त्रिशंकु प्रेम के कथा के रूप में प्रस्तुत कईल बा।
कहानी के शुरुवात में ही जगदीशपुर गाँव के हिन्दू-मुस्लिम समाज के आपसी प्रेम के मिठास, चिरिया चुरउँग के जागला के साथे ही गाँव के सभे लोग के होखे वाला सुबेर के वर्णन से ग्रामीण जनजीवन, प्राकृतिक छटा अउर देशकाल के चित्रण के अत्यंत जीवंत रूप से पाठक लोग के दिल में उकेरल गईल बा।
समाज के जब कोई प्रतिष्ठित, सम्माननीय अउर पसंदीदा व्यक्ति के जीवन में जब कोई नया मोड़ आवेला या कोई घटना घटित होला त उनसे जुड़ल, पहचानल अउर जे ना पहचानत होई उहो सबका का दिल में बसल प्यार, चिंता अउर हालात ठिक होखे के चिरौरी के उफ़ान कइसे उमड़ पड़ेला एकर जीवंत व्याख्या बहुते मार्मिक रूप से कईल गईल बा।
त्याग अउर समर्पण के दुसर नाम ही प्रेम ह। जब भी केहू व्यक्ति के जीवन त्रिशंकु प्रेम के भँवर में उलझ जाल ऊँ हा कोई एक के आपन प्रेम के त्याग केवल रिस्ते के नाते से ना कि दिल से करेके ही पड़ेला। इहो अपार प्रेम के व्यक्त करेके एगो आपन दृष्टिकोण ही ह। अइसन त्याग अउर समर्पित प्रेम के संवेदनशील झलक भावनिक तरीका से वर्णित कईल गईल बा। कहानी के एक से एक कड़ी आपस में जुड़ते हुए प्रेम के पराकाष्ठा प्रस्तुत करत बा।
समाज के लोगन के आपसी लगाव, व्यव्हार कुशलता, जनता के राजा-रानी से प्रेम, कुँवर सिंह के मेहरुनिस्सा अउर रानी के प्रति आदर, प्रेम, वचनबद्धता, रानी के कुँवरसिंह के प्रति प्रेम, त्याग, समपर्ण और एक तरफ से आपन ज़िंदगी के ही दूसरे के हवाले कर देबे के महानता कहानी के समग्रता प्रदान कइले बा।
इ कहानी के भाषा शिल्प पाठकगण के दिल के करीब ले जावे में सफल भइल। कहानी में प्रयुक्त अइसन शुद्ध साहित्यिक भाषा, भोजपुरी भाषा अउर समाज के उत्थान खातिर अत्यंत आवश्यक बा।
कहानी पढ़ला के बाद ई घटना के वास्तविकता जाने खातिर हमरा मन में जिज्ञासा निर्माण भईल अउर घर परिवार के लोगन से भी ई कहानी के चर्चा कइनी ह। बाबू वीरकुंववर सिंह के जीवन के से जुड़ल अइसन प्रेममय कहानी के जानकरी अब हमरा भईल ह।
ई घटना से भले ही उँहा के लोग परिचित होई लेकिन ई कहानी पढ़ के वीरकुंवर सिंह जी के साथ उनकर रानी के प्रेम अउर त्याग के भावना से अवगत होखे के मौका मिली। नारी के प्रति आदर, सम्मान के एक अनूठा उदाहरण सबका के सामने प्रस्तुत होई।
स्नाकोत्तर हिंदी अउर भोजपुरी विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष और प्रोफेसर रहीं डॉ. नीरज सिंह सर जी। रउआ से अइसन कलात्मक अउर मौलिक रचना आगे भी पढ़े के मौका मिलत रही ई निहोरा बा।
*ऊपर दीहल लिंक पर 'थाती' कहानी पूरा पढ़ल जाई।*
सीमा सिंह, शोध छात्रा
#मुंबई
#विश्वविद्यालय
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