इश्क समाधि_उपन्यास_समीक्षा

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देखने में सुंदर देहयेष्टि की स्त्रियों को जब उनके मनचाहे देह से कामरूपी सुख की प्राप्ती नहीं होती तब वही तिरस्कार के तीर से घायल स्त्री प्रतिशोध की ज्वाला में जलती हुई अपने शीलगुण को ताक पर रख वह सारे कर्म करती है जिससे उसका तथाकथित (सो कॉल्ड) बड़प्पन बरकरार रहे और इस अग्नि कुंड में वह अपना तन, मन, धन सर्वस्व स्वाहा कर देती है । और कहा जाता है कि, अपना शरीर, चरित्र, मान-मर्यादा, बुद्धी, तर्क सब कुछ गवाँने के बाद ही जीवन का वास्तविक सत्य अक्ल के ठिकाने लगता है ।

ऐसी ही एक मार्मिक-यथार्थ कथावस्तु लिए #बिहार- #आरा जिला, #एकवना #गाँव के नए उभरते #लेखक #ऋत #विकास अपने #प्रथम #उपन्यास #इश्क़ #समाधि
से आधुनिकता की चकाचौंध में आँखें गड़ाकर दौड़ रहे युवाओं को जीवन के वास्तविक प्रेम एवं सत्य का चश्मा देने का कार्य किया है ।

आधुनिक विचार, आत्मविश्वास, और विपरीत परिस्थितियों का सामना कर लक्ष्य को प्राप्त करने की योग्यता रखने वाली #योगिना तथा इंद्रिय-मन-बुद्धि-आत्मा, अलौकिक प्रेम की पराकाष्ठा लिए #फकीरा के द्वारा वर्तमान समय में युवाओं के क्षणिक आकर्षण (अट्रैक्शन) तथा काम प्रवृत्ति को नैतिक व आध्यात्मिक प्रेम का मोड़ दिया है जो कि आज के समय की माँग है।

उपन्यास की कथा, भाषा-शैली, पाठकों को कहीं भी बोरियत महसूस नहीं होने देगी । कुछ घटनाएँ एवं तथ्य आपके हृदय के तार को सुन्न कर सोचने पर मजबूर कर देगी। पढ़ने के बाद आप पाएँगे कि इश्क़ से समाधि तक का सफ़र आपको जीवन और प्रेम की सत्यता की परिणति का अनुभव कराने में सफल सिद्ध हुआ है।

विश्व भारती प्रकाशन से प्रकाशित यह उपन्यास  hindikitab.com से उपलब्ध हो जाएगी ।

बिहार के बुद्धभूमि गया जिले में बतौर रेलवे कर्मचारी कार्य करते हुए अपनी लेखनी को इस उपन्यास के रूप में पाठकों के समक्ष प्रस्तुत किया है। मैं विकास जी को उनके इस लेखन कार्य में  #इश्क़ #समाधि उपन्यास  के लिए आत्मीय बधाई देती हूँ 💐💐

अंततः यह भी बताते चलूँ कि विकास जी मेरे अग्रज हैं 😊 और इनकी लेखनी के दौर में आनेवाली- समय उपलब्धता की समस्याओं, अंतःकरण से लिखने की समस्त संघर्षों की साक्षी रही हूँ 😊 लगभग आठ वर्ष की कड़ी मेहनत को साकार रूप प्राप्त करने के लिए आपको कोटिशः बधाई 💐💐



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